ज़िंदगी का सफ़र अकेले तय करना लगभग नामुमकिन है। ऐसे में कोई मिल जाए तो सर्फ़ ना आपकी बातें मगर ख़ामोशी को भी समझे। सुख में तो साथ हो ही , पर दुःख में साया बनकर साथ चले । बहुत खुशनसीब होते हैं वो जिन्हें हमसफ़र का साथ मिलता है निभाने के लिए। “मेरे हमसफ़र “ एक ऐसी की कविता है जिसमें एक साथी की कामना है कि उम्र के ढलने तक उनका साथ बना रहे ।

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