हर ख़ुशी के महके पर एक हिंदुस्तानी के घर दिया जलना अनिवार्य है। दिवाली भी एक ऐसा त्योहार है जहाँ लाखों दिए जलाए जाते है । “दीयों की रोशनी” कविता में मैंने एक दीये की व्यथा बताने की कोशिश की है । जलाने से पहले इन्हें बड़े ध्यानपूर्वक तैयार करते हैं और इन्हें जलता देख बहुत ख़ुशी महसूस करते हैं । पर जल जाने के बाद हम इनकी तरफ़ ध्यान नहीं देते और यूँ ही उठा कर फ़ेक देते हैं। दीया दुखी होकर कहता है  कि ज़रा अदब से उठाना इन दीयों को…

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2 COMMENTS

  1. Diyon ki Roshni – What a beautiful poem Nisha. The essence of sacrifice and being rejected after is so powerfully described. Sometimes it may hold true for people also. And your recitation is superb. Loved it.

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