तू ख़ुशक़िस्मत है तेरे पास ममता का सागर हैं
हर परेशानी से तुझे ढक ले वो ऐसा आँचल है
दुआओँ को समेटे अपने दोनो हाथों में
लुटा कर ख़ुद को करले तुझे अपनी पनाहों में

तुझे उड़ान दे सके वो ऐसी ख़ुशनुमा हवा हैं
तेरे ज़ख़्मों पे दुलार से लगे वो ऐसी दवा हैं
तेरी उदासी भरे चेहरे पे ला दे हँसी ऐसी होती है माँ
बिन उसकी डाँट के सूना सूना सा लगता हैं जहाँ

दर्द अपना भूल कर तेरे ज़ख़्म पे मरहम लगती है
तेरे इंतेजार में खाने की मेज़ पर सो जाती है
तू बेपरवाह हो तो अपने आँसू वो छुपाती है
अपना अस्तित्व घर पर ही वो लुटाती है

अनसुनी हर बात को महसूस वो कर लेती है
मुसीबत कोई आए तो हिफ़ाज़त तेरी करती है
खड़ी हो जाती है बन के दुर्गा कभी तो कभी वो काली है
वो ना हो आसपास तो तेरा जहाँ ख़ाली है

तेरी ज़िन्दगी के हर तूफ़ान का साहिल है जो
भटकते हुए तेरे क़दमों की आख़िरी मंज़िल है वो
आके उसके क़दमों में सुकून महसूस होता है
हर छोटा बड़ा उसके दामन में महफ़ूज़ होता है

तेरी आँखों के देखे ख़्वाबों की हक़ीक़त है माँ
अपना सब कुछ लूटा कर भी सबसे दिलवाली है माँ
घरवालों को एक कर दे ऐसी मज़बूत नीव है वो
आंसूयों को तेरे अपनी कमज़ोर बाहों में भरे जो

मंदिर मस्जिद में माथा टेके तो खुदा के क़रीब हो
उसके चरणों में सर झुका दे तो जन्नत नसीब हो
खुदा की रूह और स्वरूप है जो
बिन माँगे जो पूरी हुई ऐसी मन्नत है वो

माँ!!
ऐसी होती है माँ!

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