सिंगार

      पहन कर ये गहने कर लिया है सिंगार और नहीं होता अब पी का इंतेज़ार ताक रहे हैं राहे मन हो चला अब बेचैन क्यूँकि करने लगेंगे...

सोलह सिंगार

  इतरा रहा है ये मन मेरा करके सोलह सिंगार माथे पे चमक रहा है मेरे कुमकुम सुर्ख़ लाल आईने में दिखी हक़ीक़त और अब नहीं है...

मेरे दिल के अल्फ़ाज़

कभी-कभी दिल की गहरी भावनाओं को कुछ शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है।आपको अपने ख्यालों को व्यक्त करने के लिए लंबी कविता लिखने...

खोया हुआ वक़्त

      ना जाने किसका मुझे इंतेज़ार है और ज़िंदगी क्यूँ इस क़दर बेज़ार है लौट कर आएगा खोया हुआ वक़्त है यक़ीं फ़िज़ाओं में देखो छाया फिर खुमार...

माँ

    माँ की परिभाषा क्या कोई समझ पाया है छोटे से लफ़्ज़ में कितनी गहराई छुपी है घूम आएँ भले जहाँ सारा पर मंज़िल मिलती नहीं क्यूँकि हर...

ज़िंदगी के रंग

    बेरंग सी क्यूँ लगती है आज ज़िंदगी मुझे सुकून ढूँढने चली हूँ ना जाने क्या वजह हैं तनहाई का लेकर फ़ितूर आख़िर क्या होगा ये जाना कि...

पहचान

      मंज़िल की खबर नहीं रास्ते भी अनजान हैं वक़्त है मुट्ठी में और ढूँढनी अपनी पहचान है

तेरी झाँझर

      इस ख़ामोशी को तोड़ दो ना तुम ज़रा अपनी झाँझर हलके से झनका दो मदहोशी में डूब जाएँ फिर ये समा ऐसे अपने नयनों से जाम छलका...

कान्हा

    जब भी मुझे तेरी याद आई कान्हा तेरी बांसुरी की धुन कर गई दीवाना छोड़ लोग लाज मैं दौड़ी चली आई बचपन की सखियाँ भी हुई पराई

बाप्पा

    तू है मेरी वंदना मेरी हर मुराद तू है और मेरे हर नए आग़ाज़ का अंजाम तू है दुआ क़बूल हो जाए जो तेरे दर पर...

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