ना जाने किसका मुझे इंतेज़ार है
और ज़िंदगी क्यूँ इस क़दर बेज़ार है
लौट कर आएगा खोया हुआ वक़्त है यक़ीं
फ़िज़ाओं में देखो छाया फिर खुमार है

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