थोड़ी सी अपनी तू मुस्कुराहट दे दे
वक़्त से निकाल के दो लम्हे दे दे
ज़रूरत नहीं मुझे किसी ख़ज़ाने की
अपनी बेफ़िक्री से निकाल के
बस ज़रा सी मुझे तू फ़िक्र दे दे

कर ले मेरे दर्द को महसूस
मेरे ज़ख़्मों को तू ज़रा दवा दे दे
रह ना मुझसे तू यूँ ख़फ़ा ख़फ़ा
मेरी ग़लतियों की तू मुझे
जो भी चाहे अब सज़ा दे दे

थक कर क़दम अब चूर है मेरे
राहत भरे बस दो पल दे दे
कहने को तो सारा जहाँ हैं अपना
दिल के कोने में बस छोटी सी
रहने को तू मुझे जगह दे दे

तनहा हूँ उदास हूँ बेज़ार हूँ
तेरे हिस्से का मुझे कुछ सुकून दे दे
बिता सकूँ फिर ज़िन्दगी तमाम
तेरी मेरी यादों के सहारे
बस इतनी सी तू मुझे इजाज़त दे दे

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