माँ की परिभाषा क्या कोई समझ पाया है
छोटे से लफ़्ज़ में कितनी गहराई छुपी है
घूम आएँ भले जहाँ सारा पर मंज़िल मिलती नहीं
क्यूँकि हर राह आकर उसके चरणों में ही रुकी है

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