अभी छाया है जहाँ हर ओर सन्नाटा
महफ़िल मेरे घर में यार की फिर सजेगी
कुछ पल की ही हैं ये खामोशियाँ
फ़िज़ा में फिर धुन प्यार की बजेगी

close

Don’t miss my writings!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here