मन मोह लिए हैं कितने इन कजरारे नयनों ने
हर अदा पर इनकी दिल कितने बेताब हुए हैं
जगा कर प्यास कभी ना बुझने वाली
पर्दे में शर्म ओ हया से देखो अब ये महताब छुपे हैं

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